देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं की बात होती है, तो लाखों युवाओं के मन में एक नाम सबसे पहले आता है Union Public Service Commission। Civil Services का सपना देखने वाले युवाओं के लिए UPSC केवल एक परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था नहीं है। इसके पीछे लगभग एक सदी का इतिहास, संघर्ष, बदलाव और सार्वजनिक सेवा की लंबी परंपरा जुड़ी हुई है। आज, 1 October 2026, UPSC Completes 100 Years का ऐतिहासिक पड़ाव पूरा कर रहा है।
इसकी संस्थागत यात्रा 1 October 1926 को भारत में पहली Public Service Commission की स्थापना के साथ शुरू हुई थी, उस समय यह एक Advisory Body थी और इसके Chairman तथा Members की नियुक्ति Secretary Of State द्वारा London में की जाती थी।
एक सदी के दौरान संस्था की भूमिका और संवैधानिक स्थिति में बड़ा बदलाव आया। आज Union Public Service Commission (UPSC) एक स्वतंत्र Constitutional Body है, जिसकी व्यवस्था भारतीय संविधान के Part XIV में की गई है। इस 100 साल की UPSC Journey को समझना केवल परीक्षा की तैयारी के लिए नहीं, बल्कि भारत के प्रशासनिक और Constitution History को समझने के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।
UPSC Completes 100 Years: 1 October 1926 से शुरू हुई ऐतिहासिक यात्रा

UPSC Completes 100 Years का अवसर उस संस्था की यात्रा को याद करने का मौका है, जिसकी शुरुआत ब्रिटिश शासन के दौरान हुई थी। 1 October 1926 को भारत में पहली Public Service Commission स्थापित की गई। UPSC के ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार इसके पहले Chairman Sir Ross Barker थे और उनके साथ चार Members नियुक्त किए गए थे। आयोग का मुख्यालय उस समय Delhi के Metcalfe House में था।
हालांकि, आज के UPSC और 1926 की Public Service Commission में काफी अंतर था। उस समय Commission की भूमिका मुख्य रूप से Advisory थी और उसके अधिकार सीमित थे। इसके बावजूद भारत में एक स्थायी Public Service recruiting institution की शुरुआत हो चुकी थी।
UPSC की अपनी ऐतिहासिक सामग्री के अनुसार, 1919 के Government Of India Act में Public Service Commission की स्थापना का प्रावधान किया गया था। इसके बाद इस व्यवस्था को वास्तविक रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ी और Lee Commission की सिफारिशों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यही कारण है कि Upsc History पढ़ते समय 1926 का वर्ष सबसे महत्वपूर्ण पड़ावों में शामिल किया जाता है। इसी वर्ष से उस संस्थागत यात्रा की शुरुआत हुई, जो आगे चलकर UPSC As A Constitutional Body के रूप में विकसित हुई।
Merit की सोच से शुरू हुई कहानी, Satyendranath Tagore बने पहले Indian Civil Servant
आज UPSC और Civil Services में Merit की बात सामान्य लग सकती है, लेकिन इसका इतिहास काफी पुराना है। 1855 में Indian Civil Service यानी ICS के लिए परीक्षा व्यवस्था शुरू की गई। इससे पहले East India Company में नियुक्तियां मुख्य रूप से Nomination की व्यवस्था से होती थीं। नई व्यवस्था ने Open Competition का रास्ता खोला। हालांकि शुरुआती दौर में भारतीय उम्मीदवारों के लिए परीक्षा तक पहुंचना बेहद कठिन था। परीक्षा London में होती थी, माध्यम English था और पाठ्यक्रम में Greek तथा Latin जैसे विषय भी शामिल थे।
इसी कठिन दौर में Satyendranath Tagore का नाम इतिहास में दर्ज हुआ। 21 वर्ष की उम्र में वे Calcutta से England गए और 1863 में परीक्षा पास की। 1864 में उन्होंने सेवा ज्वाइन की और वे पहले Indian Civil Servant बने। इसके बाद Surendranath Banerjee, Behari Lal Gupta और Romesh Chunder Dutt जैसे भारतीयों ने भी इस परीक्षा में सफलता हासिल की लेकिन भारतीयों के लिए रास्ता आसान नहीं था।
परीक्षा की अधिकतम आयु धीरे-धीरे घटाकर 19 वर्ष तक कर दी गई। 1919 तक 1,255 ICS अधिकारियों में केवल 78 भारतीय थे। यह आंकड़ा बताता है कि Merit आधारित परीक्षा होने के बावजूद उस समय अवसरों तक पहुंच कितनी सीमित थी। Satyendranath Tagore की कहानी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत में Civil Services की शुरुआती भारतीय भागीदारी का प्रतीक बन गई।
Lee Commission से Public Service Commission तक कैसे पहुंचा भारत?
भारत में एक स्थायी Public Service संस्था की मांग धीरे-धीरे मजबूत हुई। 1919 के Government Of India Act में Public Service Commission की व्यवस्था का प्रावधान किया गया। इसके बाद इस व्यवस्था को लागू करने को लेकर लंबे समय तक चर्चा चलती रही। अंततः इस विषय को Royal Commission On The Superior Civil Services In India यानी Lee Commission के पास भेजा गया।
1924 में Arthur Hamilton Lee की अध्यक्षता वाले Lee Commission ने भारत में Statutory Public Service Commission की स्थापना की सिफारिश की। इसके बाद 1 October 1926 को पहली Public Service Commission स्थापित हुई।
एक और महत्वपूर्ण बदलाव 1922 में हुआ, जब ICS परीक्षा पहली बार भारत में Allahabad में आयोजित की गई। इससे पहले परीक्षा मुख्य रूप से London में आयोजित होती थी। बाद में 1928 में Commission का केंद्र Delhi में स्थानांतरित हुआ।
1926 की Commission के पास आज के UPSC जैसे व्यापक अधिकार नहीं थे। इसकी भूमिका सीमित और मुख्य रूप से Advisory थी। स्वतंत्रता आंदोलन के नेताओं ने इसकी सीमित शक्तियों को लेकर लगातार सवाल उठाए। फिर भी भारत में स्थायी भर्ती संस्था का मौजूद होना आगे के संवैधानिक विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। यही History Of UPSC का वह चरण है, जहां एक सीमित Advisory Commission धीरे-धीरे एक मजबूत सार्वजनिक भर्ती संस्था की दिशा में बढ़ रही थी।
संविधान ने UPSC को दिया Constitutional Status, Articles 315 से 323 तक खास भूमिका
आज Union Public Service Commission (UPSC) की सबसे बड़ी पहचान उसका Constitutional Status है। भारतीय संविधान के Part XIV में Public Services से संबंधित प्रावधान किए गए हैं। Articles 315 से 323 तक Union और State Public Service Commissions से जुड़े प्रावधान मौजूद हैं।
Article 315 Union और States के लिए Public Service Commissions की व्यवस्था करता है। Article 316 Chairman और Members की नियुक्ति तथा उनके कार्यकाल से जुड़ा है। Article 317 Members को हटाने और Suspension से संबंधित प्रावधान बताता है। वहीं Article 320 Public Service Commissions के Functions से जुड़ा महत्वपूर्ण Article है।
26 January 1950 को संविधान लागू होने के साथ Federal Public Service Commission का नाम Union Public Service Commission हुआ और इसे Constitutional Status मिला। UPSC के आधिकारिक इतिहास में भी इस बदलाव का उल्लेख है।
संविधान निर्माताओं के लिए Public Service Commission की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण थी। Constituent Assembly में Dr BR Ambedkar ने Union और State Public Service Commissions से जुड़े Draft Articles प्रस्तुत किए थे। बाद में ये Part XIV का हिस्सा बने इसलिए UPSC As A Constitutional Body केवल एक सामान्य प्रशासनिक तथ्य नहीं है। यह भारत की संवैधानिक व्यवस्था में निष्पक्ष Public Appointments की संस्थागत संरचना को समझने की महत्वपूर्ण कड़ी है।
UPSC किन परीक्षाओं और सेवाओं के लिए करता है Recruitment?
आज UPSC Recruitment का दायरा काफी व्यापक है। आम लोगों में इसकी पहचान सबसे ज्यादा Civil Services Examination को लेकर है, लेकिन Commission कई अन्य महत्वपूर्ण Services और Posts के लिए भी Recruitment Examination आयोजित करता है।
इनमें Civil Services, Indian Forest Service, Engineering Services, Combined Medical Services, National Defence Academy और Naval Academy, Combined Defence Services तथा Central Armed Police Forces में Assistant Commandants जैसी परीक्षाएं शामिल हैं।
Civil Services Examination के माध्यम से विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में अधिकारियों का चयन किया जाता है। इसी वजह से UPSC की परीक्षाओं को लेकर युवाओं में लंबे समय से विशेष रुचि रही है।
आज की UPSC Recruitment Exam प्रक्रिया में Written Examination, विभिन्न चरणों और निर्धारित Selection Rules की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अलग-अलग परीक्षा के अनुसार Eligibility, Syllabus, Selection Process और अन्य शर्तें अलग हो सकती हैं।
UPSC की भूमिका केवल परीक्षा आयोजित करने तक सीमित नहीं मानी जाती। संविधान के Article 320 में Public Service Commissions के Functions का उल्लेख है। UPSC के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार Commission Civil Services और Civil Posts के Recruitment से जुड़े कार्य करता है। इसलिए General Knowledge के नजरिए से भी UPSC का इतिहास महत्वपूर्ण है। किसी Aspirant के लिए यह जानना जरूरी है कि जिस संस्था की परीक्षा की तैयारी वह कर रहा है, उसका विकास किस ऐतिहासिक और संवैधानिक प्रक्रिया से हुआ।
UPSC Completes 100 Years: साल पूरे होने पर क्या हुआ खास?
▪️On 1 October 2026, the Union Public Service Commission (#UPSC) completes one hundred years
▪️Its institutional journey began on 1 October 1926, when India’s first Public Service Commission was constituted – an advisory body whose Chairman and Members were appointed by the… pic.twitter.com/0n3Weduuxe
— PIB India (@PIB_India) September 30, 2026
UPSC Completes 100 Years का यह अवसर केवल ऐतिहासिक स्मरण तक सीमित नहीं रहा। 2025 में शुरू हुए Centenary Year का समापन 1 October 2026 को हो रहा है। 30 September और 1 October को New Delhi के Bharat Mandapam में दो दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किए गए।
Centenary Celebrations का एक प्रमुख कार्यक्रम Manthan नाम से आयोजित किया गया, जिसमें Civil Services के बदलते स्वरूप, Public Administration में Innovation और Constitutional Values जैसे विषयों पर चर्चा की गई। UPSC Chairman Dr Ajay Kumar ने आने वाले समय के लिए Trust, Transparency And Technology जैसे तीन Guiding Principles पर जोर दिया।
1 October 2026 को Centenary Celebrations के दौरान Commemorative Coin और Commemorative Stamp जारी किए जाने की जानकारी भी PIB ने दी है। इसके साथ 100 Landmark Judgements – Shaping The Policies Of UPSC And Public Service Commissions In India नामक पुस्तक का भी उल्लेख किया गया है।
यह कार्यक्रम इस बात की ओर भी ध्यान खींचता है कि UPSC Completes 100 Years की यात्रा केवल पुराने इतिहास की कहानी नहीं है। यह संस्था अब Digital Transformation, Transparency और Aspirant Outreach जैसे नए मुद्दों पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है।
UPSC का इतिहास UPSC Aspirants के लिए क्यों है महत्वपूर्ण?
किसी भी UPSC Journey में केवल Syllabus और Current Affairs ही सब कुछ नहीं होते। परीक्षा की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों के लिए संस्था का इतिहास समझना भी उपयोगी है। इससे Indian Administration, Constitutional Bodies और Public Services की मूल संरचना को समझने में मदद मिलती है।
UPSC Establishment का इतिहास पढ़ते समय 1926, Lee Commission, 1919 का Government Of India Act और 1950 में Constitutional Status जैसे पड़ाव विशेष महत्व रखते हैं। वहीं Indian Constitution में Articles 315 से 323 तक Public Service Commissions से जुड़े प्रावधानों को समझना परीक्षा के दृष्टिकोण से भी उपयोगी है।
Satyendranath Tagore से लेकर आज के लाखों UPSC Aspirants तक यह यात्रा कई बदलावों से गुजरी है। शुरुआती दौर में परीक्षा के लिए London जाना पड़ता था। आज देशभर के युवा विभिन्न माध्यमों से तैयारी कर सकते हैं और UPSC की परीक्षाओं में शामिल होते हैं इसीलिए UPSC Completes 100 Years केवल एक Anniversary नहीं है। यह भारत में Public Service Recruitment के लगभग एक शताब्दी लंबे विकास को देखने का अवसर है।
UPSC Completes 100 Years: महत्वपूर्ण घटनाओं की Timeline
| वर्ष | महत्वपूर्ण घटना |
|---|---|
| 1855 | Indian Civil Service में Open Competition आधारित परीक्षा व्यवस्था शुरू |
| 1863 | Satyendranath Tagore ने ICS परीक्षा पास की |
| 1864 | Satyendranath Tagore ने Service Join की |
| 1919 | Government Of India Act में Public Service Commission का प्रावधान |
| 1922 | ICS परीक्षा पहली बार भारत में Allahabad में आयोजित |
| 1924 | Lee Commission ने Statutory Public Service Commission की सिफारिश की |
| 1 October 1926 | भारत में पहली Public Service Commission स्थापित |
| 1935 | Federal Public Service Commission की व्यवस्था |
| 26 January 1950 | संविधान लागू होने के साथ UPSC को Constitutional Status मिला |
| 2025-26 | UPSC Centenary Year |
| 1 October 2026 | UPSC ने 100 वर्ष पूरे किए |
Disclaimer
यह लेख UPSC, PIB और उपलब्ध ऐतिहासिक दस्तावेजों में दी गई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। परीक्षा, Recruitment और संवैधानिक प्रावधानों से जुड़ी किसी भी वर्तमान जानकारी के लिए संबंधित आधिकारिक अधिसूचना और दस्तावेजों को अंतिम स्रोत माना जाना चाहिए।



